Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full _verified_ Now
"एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो; रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो"।
तेहना गुण गण गाय, पातक सघला प्रज्वले। 1 ॥
यह वंदन पवित्र के नीचे स्थित भगवान आदिनाथ के प्राचीन पद-चिह्नों (पगलिये) पर किया जाता है।
यह अंतिम और मुख्य वंदन शिखर पर स्थित भगवान आदिनाथ के मूल मंदिर (दादा का दरबार) में किया जाता है。
अंत में पढ़कर पूर्ण श्रद्धा से शीश झुकाएं। चैत्यवंदन के लाभ palitana 5 chaityavandan in hindi full
श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय।
2. श्री शांतिनाथ भगवान का चैत्यवंदन (दूसरा वंदन)
एकाग्र चित्त होकर ऊपर दिए गए विशिष्ट स्थान का पढ़ें।
जैन धर्म में आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक हैं । गुजरात के भावनगर जिले में स्थित पालिताना तीर्थ (सिद्धाचल) को शाश्वत तीर्थ माना जाता है, जहाँ अनंत आत्माएँ मोक्ष (सिद्धि) को प्राप्त हुई हैं। "एह गिरि ऊपर आदिदेव
णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं।
आदिनाथ अलबेला स्वामी, मरुदेवा ना लाल,कंचन वरणी काया प्रभु नी, शांति रूप विशाल;सेवक जाणी तारो प्रभुजी, राखो चरणी मांहि,'पद्म' कहे प्रभु तोत विण, अवर कोई शरणो नांही।
पुंडरीक स्वामी ने यहाँ 5 करोड़ मुनियों के साथ मोक्ष प्राप्त किया था, उनकी महान तपस्या का स्मरण。
(गुजरात) जैन धर्म का सबसे शाश्वत और सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है। जैन मान्यता के अनुसार, इस पवित्र पर्वत पर अनंत आत्माओं ने मोक्ष प्राप्त किया है। पालिताना की भावपूर्ण यात्रा को पूर्ण करने और वहां की पावन ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए 5 मुख्य स्थानों पर चैत्यवंदन (पाँच चैत्यवंदन) करने का विधान है। प्रभु प्रतिमा वंदो
यात्रा सदैव साफ, धुले हुए और सूती (कॉटन) पूजा के कपड़ों में ही करें।
प्रत्येक चैत्यवंदन करते समय इस क्रम का पालन करना चाहिए:
पालिताना में प्रत्येक स्थान पर चैत्यवंदन करते समय इस स्थापित क्रम का पालन करें:
5. मुख्य आदिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Fifth Chaityavandan of Lord Adinath)