Ziyarat E Nahiya In Hindi [2021] Guide

(Ziyarat-e-Nahiya) इमाम महदी (अ.त.फ.) की ओर से वह विशेष ज़ियारत है जो आपने अपने शिया अनुयायियों के लिए निर्धारित की है ताकि वे करबला के शहीदों, विशेषकर इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत कर सकें। इसे 'मुफाज्जल बिन उमर' के माध्यम से नस्ल के साथ प्राप्त हुआ है। इस ज़ियारत में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों के शहादत के दृश्यों का बड़ा ही भावुक और दिल दहला देने वाला वर्णन है।

मैं गवाही देता हूँ कि आप इमामुल मुत्तक़ीन (परहेज़गारों के इमाम) हैं, और आपका वादा सच है, और आपकी बात सच है, और आप अल्लाह की राह में सब्र (धैर्य) करने वालों में से हैं।

ज़ियारत-ए-नाहिया: महवियत, इतिहास और हिंदी में इसका महत्व

ज़ियारत की शुरुआत पैगंबरों (Prophet) और इमामों पर सलाम भेजने के साथ होती है। इसके बाद, इमाम हुसैन (अ.स.) से सीधे मुखातिब होकर उनपर सलाम भेजा जाता है और फिर कर्बला के दिनों को बयान किया जाने लगता है। सबसे दिल दहला देने वाला हिस्सा तब आता है जब इमाम महदी (अ.ज.) कहते हैं: ziyarat e nahiya in hindi

इसके बाद आती है वह प्रसिद्ध इबारत: "ला'अनल्लाहु उम्मतन जहलेत हक्ककुम..." – यानी खुदा उन लोगों पर लानत भेजे जो आपके हक को जानते हुए भी उसे भूल गए, और उन लोगों पर जिन्होंने आपकी विरासत को नष्ट किया।

"ऐ अबा अब्दिल्लाह! मैं आप पर सलाम भेजता हूँ, उस दर्द और मुसीबत पर जो आपने झेली। आप पर लानत हो उन लोगों की जिन्होंने आपके खिलाफ जंग की, आप पर लानत हो उन लोगों की जिन्होंने आपके मकतल (शहादत की जगह) की नींह रखी। मैं आपके दुश्मनों से बेज़ार हूँ, और आपके मकाम (उच्च स्थान) को क़ुर्बानी के तौर पर पेश करता हूँ।"

इतिहास की किताबों के मुताबिक, यह ज़ियारत शिया हदीस की मशहूर किताबों जैसे 'मज़ार-ए-कबीर' और 'बिहारुल अनवार' में दर्ज है। यह ज़ियारत दो रूपों में मिलती है: (Ziyarat-e-Nahiya) इमाम महदी (अ

ज़ियारत-ए-नाहिया की मुख्य विशेषताएँ और विषय

इस संस्करण में कर्बला के प्रत्येक शहीद का नाम लेकर उन पर सलाम भेजा गया है और उनके हत्यारों पर लानत (धिक्कार) भेजी गई है। यह ऐतिहासिक दृष्टि से कर्बला के शहीदों के नामों की प्रामाणिक सूची जानने का एक बेहतरीन स्रोत है।

ऐसा माना जाता है कि इस ज़ियारत को इमाम महदी (अ.ज.फ.) ने अपने शिष्यों को सिखाया था। इसमें न केवल करबला के घटनाक्रम का ज़िक्र है, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति अत्यधिक प्रेम और उनके दुश्मनों के प्रति घृणा का इज़हार भी है। और आपका वादा सच है

ज़ियारत-ए-नाहिया (Ziyarat-e-Nahiya) एक प्रसिद्ध ज़ियारत है जो इमाम हुसैन (अ.स.) के लिए पढ़ी जाती है। यह ज़ियारत हज़रत इमाम महदी (अ.त.फ.श.) द्वारा इमाम हुसैन (अ.स.) के स्मरण और उनकी शहादत की दुखद घटना के प्रति गहरी श्रद्धांजलि स्वरूप कही गई है। नीचे इस विषय पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत है:

कर्बला के शहीदों के ग़म में रोना और इस ज़ियारत को तवज्जो से पढ़ना गुनाहों के कफ़ारे का सबब बनता है।

यदि आप इस विषय पर कुछ और जानना चाहते हैं, तो कृपया मुझे बताएं:

मैं उन ज़ालिमों पर लानत भेजता हूँ जिन्होंने आप पर और आपके परिवार पर जुल्म किया।

इमाम महदी (अ.स.) अपने दादा इमाम हुसैन (अ.स.) को उनके गुणों और संघर्ष के साथ याद करते हैं।