भाषण के अंतिम 20 मिनटों में डॉ. जाकिर नाइक ने श्री श्री रविशंकर द्वारा लिखित पुस्तक "हिंदू धर्म और इस्लाम" की समीक्षा की। उन्होंने दावा किया कि पुस्तक में दोनों धर्मों को करीब लाने के प्रयास में कुछ अनुवाद और वैचारिक त्रुटियां थीं, जिन्हें उन्होंने मंच से रेखांकित किया।
डॉ. नाइक के बाद आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मंच संभाला। उन्होंने अपने आवंटित 60 मिनटों में से केवल 35 मिनट ही बात की। उनका दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यावहारिक, आध्यात्मिक (Spiritual) और मानवतावादी था।
ईश्वर सर्वव्यापी है और हर कण में मौजूद है (अद्वैत)।
उन्होंने वेदों का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर की कोई तस्वीर या मूर्ति नहीं है ( न तस्य प्रतिमा अस्ति )। dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
डॉ. ज़ाकिर नाइक अक्सर हिंदू ग्रंथों (वेद, पुराण) का हवाला देते हैं और तुलना करते हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि "यदि हिंदू धर्म में ईश्वर एक है, तो मूर्ति पूजा क्यों?" हालाँकि, उन्होंने कभी नाम लेकर श्री श्री रवि शंकर को लक्षित नहीं किया।
: उन्होंने समझाया कि ईश्वर केवल आसमान में नहीं रहता, बल्कि सृष्टि के हर कण (जड़ और चेतन) में वास करता है।
Find of their arguments on specific topics (like idolatry or prophethood) Compare their theological approaches in more depth Literalism Dr Zakir Naik vs Sri Sri Ravi
: Dr. Zakir Naik focused on a scriptural approach, quoting extensively from the Quran and Hindu Vedas (such as the Yajurveda and Rigveda) to argue for a monotheistic concept of God that he claimed is shared by both faiths. Spirituality vs. Literalism
Dr Zakir Naik vs Sri Sri Ravi Shankar Debate: ऐतिहासिक बहस का पूरा विश्लेषण
: The event featured opening presentations from both scholars followed by a rebuttal and a public Q&A session. Key Arguments and Perspectives इसलिए वह निराकार है
डॉ. नाइक ने वेदों के आधार पर निराकार ईश्वर की पूजा पर जोर दिया और मूर्ति पूजा का खंडन किया, जबकि श्री श्री ने इसे ईश्वर के साकार रूप की साधना के रूप में उचित ठहराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर निराकार (Nirguna) भी है और साकार (Saguna) भी। ईश्वर सर्वव्यापी है, इसलिए वह निराकार है, लेकिन भक्त के लिए वह साकार रूप में भी प्रकट हो सकता है।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म ईश्वर को निराकार (निर्गुण) के साथ-साथ साकार (सगुण) रूप में भी देखता है। उन्होंने कहा कि इंसान का मन निराकार को समझने के लिए प्रतीकों का उपयोग करता है।
इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF)